लव और ला का बैलेंस ही भारतीय संस्कृति
शनिवार को सत्यवती कॉलेज के सेमिनार हॉल में 'समान नागरिक संहिता और भारतीय संस्कृति' विषय पर ब्रह्माकुमारी लता बहन (ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय) ने भारतीय संस्कृति में समाहित समान नागरिक संहिता विषय पर अपने अद्भुत विचार रखे। उन्होंने कहा हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम की बात करती है। कानून मनुष्य के जीवन को सहज और सुचारू रूप से चलाने के लिए बनाए जाते हैं। किंतु आज सिर्फ सखती की बात की जाती है जो कि एक तरफा सी हो गयी है। उन्होंने कहा यदि ला (कानून) के साथ लव (इनसानियत) को जोड़ दिया जाए तो बहुत सारे फसाद अपने आप ही खत्म हो जाएंगे और व्यक्ति के जीवन में समानता अपनेपन बढ़ेगी।
श्री अजय वीर सिंह (वरिष्ठ अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट) ने आर्टिकल - 44 पर अपने विचार मुख्य व्यक्त करते हुए कहा कि समान नागरिक अधिकार महिलाओं के हित में है क्योंकि हर धर्म में महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है मसल जमीन से संबंधित मामले, विवाह, तलाक, गोद लेना इत्यादि। गोवा देश का पहला राज्य है जहां समान नागरिकता कानून लागू है और इसका लाभ सभी वर्गों को मिल रहा है।
अध्यक्षीय भाषण - सांस्कृतिक गौरव संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री श्री दिनेश चंद्र त्यागी ने ओजपूर्ण तरीके से इतिहास की भूलों और गौरव पर विचारोतेजक वक्तव्य दिया। संस्थान के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री मनोज कुमार गुप्ता ने युवाओं को देश हित में जुड़ने का आहवान किया। कार्यक्रम में उपमहामंत्री श्री राजेन्द्र प्रसाद शर्मा भी उपस्थिति रहे।
कार्यक्रम का आयोजन सांस्कृतिक गौरव संस्थान, दिल्ली प्रदेश इकाई द्वारा किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश सचिव मनीष जैन एवं प्रदेश अध्यक्ष डॉ प्रेम शंकर चौधरी की सक्रिय सहभागिता रही ।